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हिंदी ग़ज़ल (देखा है)
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हिंदी ग़ज़ल (देखा है)


मोहब्बत में हमने उन्हें
चार चाँद होते देखा है।
कभी क़रीबियों के मौसम में,
कभी अलगाव होते देखा है।

न जाने किस मिट्टी से बना है
यह शौक़-ए-दिल भी,
हर दफ़ा टूटकर भी दिल को
फ़िर आबाद होते देखा है।

उनकी यादों की सुई से
जो सिला गया सीना,
हमने अपने ही दिल को
तार-तार होते देखा है।

पूछते हैं लोग हमसे
अब और क्या लिखोगी?
हमने तो हर शेर में
उन्हें ही आबाद होते देखा है।


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