मोहब्बत में हमने उन्हें
चार चाँद होते देखा है।
कभी क़रीबियों के मौसम में,
कभी अलगाव होते देखा है।
न जाने किस मिट्टी से बना है
यह शौक़-ए-दिल भी,
हर दफ़ा टूटकर भी दिल को
फ़िर आबाद होते देखा है।
उनकी यादों की सुई से
जो सिला गया सीना,
हमने अपने ही दिल को
तार-तार होते देखा है।
पूछते हैं लोग हमसे
अब और क्या लिखोगी?
हमने तो हर शेर में
उन्हें ही आबाद होते देखा है।