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स्वप्न
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स्वप्न


कुछ लोगों का कहना है कि स्वप्न आता है
क्यूंकि आपका दिमाग़ सोता नही।
पर मैं कभी कभी जीती हूं
इस स्वप्न से।
एक राहत मुझे मिलती है
इस स्वप्न में।
जागती जिनको नहीं पाती
उन्हें पा लेती हूं स्वप्न में।
एक पल की होती एक दृश्य की होती
यह स्वप्न।
और वह एक दृश्य मुझे
इस दुनिया से अलग कही ले जाती।
जहाँ मेरी जान रहता, जिसे मैंने जागते 
खो दी थी।
कभी डरावनी भी है ये स्वप्न
तो स्वप्न कहती और होश में भूला देती हूं।
स्वप्न स्वप्न भी है और स्वप्न जरुरी भी है।


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